HomeHealthहिंदी समाचार - शायरी: 'कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं',...

हिंदी समाचार – शायरी: ‘कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं’, आज पढ़ें दर्द में डूबे कलाम- न्यूज़ 18 हिंदी


शायरी: उर्दू शायरी (उर्दू शायरी) जज्बीत की दुनिया है। इसमें हर जज्जीबात (भावना) को क़लमबंद किया गया है। शायरी में जहाँ मुहब्बीत, दर्द से लबरेज़ जज्बीबात को जगह मिली है, वहीं इंसानी ज़िंदगी के दूसरे पहलुओं को भी ख़ूबसूरत के साथ उकेरा गया है। अगर मुहब्बीत का जिक्र है, तो इस्क़ में मिलने वाले दर्द को भी दिलकश अंदाज़ में पेश किया गया है। एक तरह से कहें तो शायरी दिल से निकली आह है, चाह रही है और सद् है, जिसे हर शायर (कवि) ने अपने जुदा अंदाज़ में पेश किया है। आज हम शायरों के ऐसे ही निश्चित’तीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए भारत में हुए हैं। आज की इस कड़ी में पेश हैं ‘दर्द’ पर शायरों का नज़रिया और उनकी कलाम के चंद रंग। आप भी इसके लुद्रफ़ उठाइए।

अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे
बेहिस बनाया गया है मुझे बहुत ज़िंदगी है
शकील बदायूँनी

इश्क़ से तबीयत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा मिली दर्द-ए-बेदवा मिला
मिर्ज़ा ग़ालिब

ये भी पढ़ें – शायरी: ‘दरमियाँ के फ़ासले का तय सफ़र कैसे करें’, मुहब्बत से लबरेज़ शायरी

ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम ‘अमीर’
सभी जहां का दर्द हमारे जिगर में है
एमरनाई

बे-नाम सा ये दर्द रहना क्यूं नहीं जाता
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूं नहीं जाता
निदा फ़सली

दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब
मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं
हफ़ीज़ जालंधरी

अब ये भी ठीक नहीं है कि हर दर्द को दूर होने दो
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं
जां निसार अखार

आज तो दिल के दर्द पर हंस कर
दर्द का दिल दुखा दिया मैंने कहा
ज़ुबैर अली ताबिश

दर्द हो दिल में तो दवा कीजे
और जो दिल ही न हो तो क्या कीजे
भुगतानकर्ता लविवि

दर्द-ए-दिल कितना पसंद आया उसे
मैं जब मैंने आह उस ने वाह ’की
आसी भ्रस्टिपुरी

ये भी पढ़ें – शायरी: ‘हम न सोए रात थक कर सो गई’, पेश हैं दिलकश कलाम

इस्तेमाल के बाद दर्द भी देने लगा मज़ा
हंस हंस के आह आह किए जा रहे हैं मैं
जिगर मुरादाबादी (साभार / रेखांश)



LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read