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स्वामी विवेकानंद जयंती: जानें स्वामी विवेकानंद से जुड़ी 10 अनोखी बातें, क्या है बेलूर मठ से उनका संबंध


स्वामी विवेकानंद जयंती: स्वामी विवेकानंद का जयंम 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता में हुआ था। उनका बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। उनमें उन्होंने विश्व में भारत के अध्यात्म का डंका बजाया। स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर, 1893 को शिकागो, अमेरिका की विश्व धर्म सम्मेलन सभा में भाषण दिया, जिसके बाद भारत को पूरी दुनिया के सामने आत्मिक के केंद्र के तौर पर देखा जाने लगा। स्वामी विवेकानंद के विचारों ने युवाओं को सफलता का रासता दिखाया है। इसके अलावा बेलूर मठ से स्वामी विवेकानंद का गहरा संबंध रहा है। यह पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में है। इसकी स्थापना उन्हें रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं में गहरी आस्था रखने वाले साधु-संन्यासियों को संगठित करने के लिए 1 मई, 1897 में की थी, ताकि रामकृष्ण परमहंस के उपदेशों को आम लोगों तक पहुंच सके। आज हम आपको स्वामी जी के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें बता रहे हैं-

1. स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता के एक कायस्थ परिवार में हुआ था। महज 25 साल की उम्र में नरेंद्र नाथ दत्त घर-बार छोड़कर एक साधारण संन्यासी बन गए थे और संन्यास लेने के बाद ही उनका नाम स्वामी विवेकानंद पड़ा।

2. विवेकानंद जी के पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था, जो कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील थे। जबकि उनकी मां भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों वाली महिला थीं। विवेकानंद जी का रूख बचपन से ही अपनी मां की तरह आध्यात्मिकता की ओर अधिक था।

यह भी पढ़ें- स्वामी विवेकानंद जयंती: जानें कब है स्वामी विवेकानंद जयंती3. साल 1871 में आठ साल की उम्र में नरेंद्र नाथ स्कूल गए और बाद में साल 1879 में उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज की प्रवेश परीक्षा में प्रथम परीक्षा हासिल की। जिससे ये साबित होता है कि वे पढ़ाई-लिखाई में बहुत अच्छे थे।

4. रामकृष्ण परमहंस को स्वामी विवेकानंद ने अपना गुरु माना था। रामकृष्ण परमहंस से उनकी मुलाकात साल 1881 में कलकत्ता के दक्षिणेश्वर के काले मंदिर में हुई थी और वहाँ से ही परमहंस की विचारधारा से विवेकानंद जी इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें अपना गुरु मान लिया।

5. विवेकानंद और रामकृष्ण शरण परमहंस की मुलाक़ात कोई साधारण नहीं थी। क्योंकि विवेकानंद जी ने मुलाक़ात के दौरान उनसे वही सवाल किया था जो वो दूसरों से अक्सर करते थे कि ‘क्या आपने भगवान को देखा है?’ जिसका जवाब देते हुए रामकृष्ण परमहंस ने कहा कि ‘हां मैंने देखा है, मैं भगवान को उसी तरह साफ देख रहा हूं क्योंकि आप देख सकते हैं। बात सिर्फ इतनी है कि मैं तुमसे बहुत गहराई से महसूस कर सकता हूं। ‘ रामकृष्णन परमहंस के इन्हीं शब्दों ने विवेकानंद के जीवन पर गहरे छाप छोड़ी थी।

6. 11 सितंबर 1893 में अमेरिका में हुई धर्म संसद में जब स्वामी विवेकानंद ने अपने संबोधन से भाषण की शुरुआत ‘अमेरिका के मुसलमानों और बहनों’ से की, तो, पूरे दो मिनट तक शिकागो के कलाकार इंस्टीट्यूट ऑफ तालमेल बजती रहे। ये घटना हमेशा-हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गई है।

7. स्वामी विवेकानंद द्वारा जहां 1 मई 1897 को कलकत्ता में रामकृष्ण मिशन, तो वहीं 9 दिसंबर 1898 को गंगा नदी के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना की गई।

8. स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिन यानी कि 12 जनवरी को भारत में प्रतिवर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस समारोह मनाया जाता है। जिसकी शुरुआत 1985 से की गई थी।

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9. युवा अवस्था में ही स्वामी विवेकानंद दमा और शुगर की बीमारी से ग्रस्त हो गए थे और उन्होंने एक बार अपनी ही मौत की भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि, ‘ये बीमारियां मुझे 40 साल भी पार नहीं करने देंगी।’ गौरतलब है कि उनकी मृत्यु को लेकर उनकी ये भविष्यवाणी सच साबित हुई और उन्होंने महज 39 वर्ष की आयु में ही 4 जुलाई 1902 को बेलूर स्थित रामकृष्ण मठ में महासमाधि लेते हुए अपने प्राण त्याग दिए।

10. महासमाधि लेने के बाद स्वामी विवेकानंद का अंतिम संस्कार उनके अनुयायियों द्वारा बेलूर में गंगा तट पर किया गया। ये वही गंगा तट था, जिसके दूसरी ओर, उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का अन्तिम संस्कार हुआ था। (साभार- एस्ट्रोसेज.कॉम)



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