HomeHealthसूर्य नमस्कार सहित ये आसन करेंगे मन को शांति, शरीर बनेगा दृढ़

सूर्य नमस्कार सहित ये आसन करेंगे मन को शांति, शरीर बनेगा दृढ़


रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। यह भी मानते हैं कि आज के दिन सूर्य नमस्कार करने से अधिक लाभ मिलता है। हर रविवार योग एक्सपर्ट सविता यादव लाइव योगा सेशन (लाइव योग सत्र) में सूर्य नमस्कार का अभ्यास करवाती हैं। सूर्य नमस्कार शरीर को दशांश और लचीला बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही कई सूक्ष्मतम संयम भी करवाए जाते हैं। इसमें बताया गया है कि यदि आपका शरीर स्वस्थवस्थ है तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आपका बॉडी का शेप करता है। लेकिन शकटेश बने रहने के लिए जरूरी है कि आप नियमित रूप से योगाभ्यास करें। आज के दिन सूर्य नमस्कार (सूर्य नमस्कार) का योगाभ्यास विशेष रहता है। आप हम इसे भली तरह से करेंगे। यह योग पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करता है।

सूर्य नमस्कार कई आसनों को मिलाकर बनाया गया है। हर आसन के बाद शवासन में थोड़ा थोड़ा विश्राम लें और अंत में अनुलोम विलोम का दस मिनट का अभास जरूर करें।


सूर्य नमस्कार की मदद से कई बीमारियों (बीमारियों) से न सिर्फ बचाव ही किया जा सकता है, बल्कि इससे दूर भी किया जा सकता है। योग करने से शरीर को एनर्जी (ऊर्जा) मिलती है और मन शांत रहता है। साथ ही ऑप्टियम से पहले ये तीन नियम जरूर ध्‍यान रखें कि इसमें योग के विपरीत शवासन, गति का अनुसरण करें और अपनी क्षमता के अनुसार योग करें।सूर्य नमस्कार (सूर्य नमस्कार)

सूर्य नमस्कार को सभी योगासनों में सबसे ज्यादा पावरफुल माना जाता है। सूर्य नमस्कार ऐसा योग है जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है। पर सूर्य नमस्कार को करने का सही तरीका बहुत कम लोग जानते हैं।

प्रणाम आसन- इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पंजे जोड़कर अपने आसन मैट के किनारे पर खड़े हो जाएं। फिर दोनों हाथों को कंधे के समान उठाएं और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें। दोनों हथेलियों के पृष्ठभाग एक दूसरे से चिपकाए रहें और नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएं।

हस्ततुन्नासन- इस आसन को करने के लिए गहरी सांस भरें और दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं। अब हाथ और कमर को झुकाते हुए दोनों भुजाएं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएं।

हस्तपाद आसन- इस आसन में बाहर की ओर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर नीचे की ओर झुकें। अपने दोनों हाथों को कानों के पास से घुमाते हुए ज़मीन को छूते हैं।

अश्व संचालन आसन– इस आसन में अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रखें, सांस लेते हुए दाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और बाएं पैर को घुटने की तरफ से मोड़ते हुए ऊपर रखें। गर्दन को ऊपर की तरफ उठाएं और कुछ देर इसी तरह स्थित रहें।

पर्वत आसन- इस आसन को करने के दौरान सांस लेने के दौरान बाएं पैर को पीछे ले जाएं और पूरे शरीर को सीधी रेखा में रखें और अपने हाथ को ज़मीन पर सीधा रखें।

अष्टांग नमस्कार- इस आसन को करते हुए अपने दोनों घुटने ज़मीन पर टिकाएँ और साँस छोड़ते हैं। अपने कूल्हों को पीछे ऊपर की ओर उठाएं और अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुआरे और कुछ देर इसी तरह की स्थिति में रहें।

भुजंग आसन- इस आसन को करते हुए धीरे-धीरे अपनी सांस छोड़ते हुए छाती को आगे की और ले जाएं। हाथों को ज़मीन पर सीधा रखें। गर्दन पीछे की ओर झुकाएं और दोनों पंजे को सीधा रखें।

मार्जारी आसन- मार्जरी आसन एक आगे की ओर खिलाने और पीछे मुड़ने वाला योग आसन है। वज्रसन में बैठें और कैट वॉक पोज में आएं। इसके बाद गहरी सांस भरें और गहरी सांस छोड़ें।

शवासन- मैट पर बैक के फोर्स लेट जाओ और आंखें मूंद बनाएं। पैरों को आराम की मुद्रा में हल्का खोल कर रखें। पैर के तलवे और मुखियाँ ऊपर की ओर होनी चाहिए। हाथों को लगाकर हथेलियों को ऊपर की ओर खोलकर रखें। पैर से शरीर के हर हिस्से पर ध्यान केंद्रित करते हुए धीरे-धीरे सांस बाहर करें। धीरे धीरे इसे कम करें। जब शरीर में राहत महसूस हो तो आँखें बंद करके ही थोड़ी देर उसी मुद्रा में आराम करें।



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