HomeHealthविंटर ब्लूज से कैसे पाएं निजात, जानें डॉ की राय- News18 हिंदी

विंटर ब्लूज से कैसे पाएं निजात, जानें डॉ की राय- News18 हिंदी


जीवन में कभी-कभी सब उदास हो सकते हैं, लेकिन सर्द मौसम में उदास होने की अलग बात है क्योंकि यह मौसमी उदासी है। साल का वह कब है जब अंधेरा और धूसर आसमान होने लगता है और धूप जैसे बीटी सी एक यादगार हो जाती है। सर्दियांज़िंग का प्रकोप और संक्रमणों की अधिकता के बारे में आता है। यह आपके मूड खराब होने की वजह भी बन सकता है यानी आप विंटर ब्लूज (शीतकालीन ब्लूज़) का शिकार हो सकते हैं। इससे जूज़ने के लिए हमें ख़ुद को तैयार करना पड़ता है। तो इस सर्दी में ऐसा क्या करें कि मूड खुशगवार भी बना रहें और धूप सी गर्मजोशी भी महसूस हो। इसके लिए अधिक कुछ नहीं करना निपटाना अपने दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव लाना है। इससे निजात पाने के लिए मोटे तौर पर कुछ तरीके बेहद कारगर साबित होते हैं। तो डॉ। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में साइकोलॉजी (क्लीनिकल साइकोलॉजी) डिपार्टमेंट की एचओडी (एचओडी) डॉ। गयशी को बताएं ऐसे ही तरीकों को अपनाएं और विंटर ब्लूज को दूर भगाएं।

क्या बला है विंटर ब्लूज:
सर्दियों में लाइफ स्लो (स्लो) हो जाता है। इस दौरान ज्यादातर लोगों में डिप्रेशन (अवसाद) होना सामान्य बात है। कभी-कभी एंग्जाइटी (चिंता) और डिप्रेशन की फिलिंग (महसूस करना) एक साथ होते हैं। एनर्जी लेवल (ऊर्जा स्तर) कम हो जाता है। यह मिजाज़ से संबंधित मौसमीय भावात्मक प्रभाव (दोष) है। जो हर साल एक ही समय पर होने वाले अवसाद से प्रभाविताना जाता है। यह तब होता है जब वर्ष के कुछ निश्चित समय पर सूर्य का प्रकाश कम होता है। ठंड की वजह से कम एक्टिविटी (गतिविधि) होती है। हम कम काम करते हैं और इस कारण से भी डिप्रेशन होता है। इसके लक्षण थकान, अवसाद, निराशा और समाज से कटना है।

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ः स्वास्थ्य पर ध्यान दें:

विंटर (शीतकालीन) में हमें फिजिकल हेल्थ के अलावा मेंटल हेल्थ का खास ध्यान रखने की जरूरत है। क्योंकि इस दौरान कई लोगों की मेंटल हेल्थ पर प्रभाव पड़ता है। छोटे सर्द दिन और हड्डियों को जमा देने वाली लंबी रात में हमारे शरीर सर्कैडियन घड़ी (बॉडी क्लॉक) का रिदम गड़बड़ा देती हैं। इस घड़ी के मुताबिक़ दिन और रात में शरीर के काम करने का तरीका अलग-अलग होता है। इससे बचने के लिए खुद को सक्रिय (सक्रिय) रखें। एक्सरसाइज करने से खुशी के हॉर्मोंस (हार्मोन) रिलीज होते हैं। हम अच्छा महसूस करते हैं और सक्रिय महसूस करते हैं।

अच्छा खाट-पीरे:

इस मौसम में आप जो खा रहे हैं उस पर एक नजर रखना जरूरी है। चीनी और वसा से भरे उत्पादों से दूर रहें। भले ही वे खाने से तुरंत आपको अच्छा लगे, लेकिन जल्द ही आप थकान महसूस करने लगते हैं। इसलिए बेहतर मूड के लिए न्यूट्रीशनल (पोषण) और बैलेंस डाइट लैंग। इस मौसम में बहुत अधिक से अधिक पानी पीने को तवज्जो दें। धूप में रहने की कोशिश करें। सूरज की रोशनी में विटामिन डी मिलता है। अध्ययनों में देखा गया है कि विटामिन डी की कमी से अवसाद होता है। इसके लिए ऑफिस के बाहर लंच लें या एक छोटा ब्रेक लगाकर बाहर टहलें। खिड़की के पास काम या पढ़ाई भी कर सकते हैं।

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सोशलिपज स्टे:
इस दौरान गर्म बिस्तर में बैठकर गर्म कॉफी के घूंट लेने की जगह घर से बाहर निकलें और दोस्तों से मिलें। सोशिलज (सोशलाइज) होना यानी मेलजोल बढ़ाना खुद को सकारात्मक और खुश रखने के बेहद उपयोगी तरीकों में से एक है। तब भी जब आप अस्वस्थ हैं और आपका बाहर निकलने का मन नहीं है, तो आप दोस्तों और परिवार को घर बुला सकते हैं। जिन्हें आप सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, उन लोगों के साथ अपनी परेशानी बांटना भी महत्वपूर्ण है। आइसोलेशन (अलगाव) में रहने से राहत।

टेक ए ब्रेक:
यह भी जरूरी है कि छोटे-छोटे ब्रेक हर रोज अपने लिए निकाले जाएं। यहां तक ​​कि केवल आधा घंटा ही क्यों न हो। इस वक्त अपनी हॉबीज (शौक) को दें। फिर से वो सिंगिग का शौक हो या डांसिंग का। जो भी आप करना चाहते हैं करें। हम अपने पुराने शौक छोड़ देते हैं बस जमशेदपुर (मैकेनिकल) लाइफ हो जाती है इसे में अनंत करते हुए हॉबीज को भी साथ चल रहे हैं। वह करें जिसमें आप अच्छे हैं। अच्छा फील करते हैं वो काम जरूर करते हैं। इससे आपकी सेल्फ एस्टीम (सेल्फ एस्टीम) को बढ़ावा मिलेगा।

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सोशल मीडिया पर समय सीमित करें:
सोशल मीडिया पर लंबे समय के लिए शेड्यूल बनाएं। इस दौरान हम बहुत आक्रामक (उत्पादक) काम नहीं करते हैं और हमें लगता है कि हमारा पूरा दिन बेकार चला गया है। हमने कुछ भी कंस्ट्रेक्टिव (रचनात्मक) नहीं किया। इसकी जगह पालतू जानवर या अपने बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम ठहराने को तवज्जो दें। अक्सर ऐसा नहीं कर पाने से पैरेंट्स को जिम्मेदारी सही से न हैंडलाने की गिल्ट (गिल्ट) फीलिंग आती है। इससे भी डिप्रेशन होता है।

ग्रेटिट्यूड एक्सरसाइज अपनाएं:
किसी से भी स्वयं की तुलना करने से। ग्रेटिट्यूड (आभार) का होना भी आवश्यक है। रोज सुबह और रात में सोने से पहले आपके साथ जो अच्छी चीजें हुईं उन्हें पांच मिनट याद रखें। कुछ अच्छा न भी हुआ तो ये सोचकर खुश हों कि आप अभी सांस ले रहें हैं, सही सलामत है। इस ग्रेटिट्यूड एक्सरसाइज से खुशी मिलती है।

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छोटे लक्ष्य बनाएँ:
जरूरी नहीं कि बड़े लोग हों। छोटे ही सही लेकिन लक्ष्य हासिल करें ये आपके जीवन को प्रेरणा देते हैं। बगैर मकसद की जिंदगी फ्रस्ट्रेशन (निराशा) और डिप्रेशन बढ़ा देती है।

रीडिंग को चलो:
कुछ देर रीडिंग (पढ़ना) को चलो। स्पेशलली अच्छी नींद के लिए अच्छा पढ़ें, जो पसंद हो वह पढ़ें। इससे तनाव और डिप्रेशन से निजात मिलती है। ये छोटी –छोटी बातें काम की है।

प्रोफेशनल्स की मदद लें:
सब करने के बाद भी आप बेहतर महसूस नहीं कर रहे हैं। बहुत निराशा हो, नेगेटिव विचार आते हैं तो किसी प्रोफेशनल (पेशेवर) की मदद लेने में कोई स्पष्ट नहीं ।अपनी भावनाओं को केवल सर्दियों के ब्लूज का लेबल लगा कर न झटकें।



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