HomeHealthमूड स्विंग कब बन जाता है खतरनाक बीमारी, जानें कैसे पहचानें- News18...

मूड स्विंग कब बन जाता है खतरनाक बीमारी, जानें कैसे पहचानें- News18 हिंदी


मूड स्विंग (रैपिड मूड स्विंग्स) बायोलॉजिकल डिसऑर्डर होता है, जिसकी वजह से दिमाग में एक प्रकार का रासायनिक असंतुलन हो सकता है। मूड स्विंग होने पर कभी व्यक्ति बेहद खुश और कभी बहुत उदास हो जाता है। हालांकि बार-बार मूड बदलने का कारण खून में मौजूद कार्टिसोल जिसे स्ट्रेस का हिलना या थाइरिलोन असंतुलन भी हो सकता है। यह महिलाओं और पुरुषों दोनों को किसी भी उम्र में हो सकता है।

मूड स्विंग्स को अमूमन लोग बेहद हल्के ढंग से भी लेते हैं। लेकिन कई बार मूड स्विंग्स खतरनाक भी साबित हो सकते हैं। कई बाद मूड स्विंग्स की वजह से कई लोगों के मन में आत्महत्या जैसे घातक विचार भी आते हैं। मूड स्विंग्स कुछ दिनों से लेकर बहुत लंबे समय तक के लिए भी हो सकता है। कई बार मूड स्विंग्स की वजह से लोगों को जरूरत से ज्यादा खरीदारी, लोगों से बेवजह उलझने जैसी चीजों में भी अनचाहे ही शामिल हो जाते हैं। अगर आपके साथ वर्तमान में ऐसी ही कोई समस्या है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।

यह भी पढ़ें: गुड़ के फायदे: ग्राम के फायदे जानते हैं कि आप भी इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं

या यदि आप वर्तमान में किसी ऐसे ही पशोपेश में हैं, या या आत्महत्या पर विचार कर रहे हैं, तो आप राष्ट्रीय आत्महत्या निवारण लाइफलाइन के नंबर पर 1-800-273-8255 पर कॉल कर अपनी समस्या बता सकते हैं। यहां आपको उचित परामर्श मिलेगा। राष्ट्रीय आत्महत्या निवारण लाइफलाइन 24/7 खुला रहता है।

मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां:
कई मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां मूड में गंभीर बदलाव का कारण बन सकती हैं। उन्हें अक्सर मूड डिसऑर्डर के रूप में जाना जाता है। आइएए हीथलाइन वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट के आधार पर जानते हैं कि उनके बारे में:

बाइपोलर डिसऑर्डर (द्विध्रुवी विकार): यदि आपको बाईपोलर डिसऑर्डर है, तो कई बार अचानक आप एकदम से खुश या एकदम से अफ़सोस में आ सकते हैं। लेकिन बाइपोलर डिसऑर्डर से जुड़े मूड स्विंग्स आम तौर पर साल में कुछ ही बार होता है, यहां तक ​​कि रैपिड-साइकलिंग बाइपोलर डिसऑर्डर में भी ऐसा ही है।

साइक्लोथैमिक डिसऑर्डर (साइक्लोथाइमिक विकार):

साइक्लोथिमिक डिसऑर्डर या साइक्लोथाइमिया, बाइपोलर डिसऑर्डर की तरह यह भी एक हल्का, सामान्य सा मूड स्विंग ही है। इसमें, कई बार लोगों के इमोशन ऊपर-नीचे होते हैं लेकिन यह समस्या बायपोलर डिसऑर्डर की तुलना में कम गंभीर है।

मेजर डिप्रेसिव बायपोलर डिसऑर्डर (मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर, MDD)

एमडीडी से पीड़ित लोग लंबे समय तक बहुत ज्यादा दुख का अनुभव करते हैं। एमडीडी को कभी-कभी क्लिनिकल डिप्रेशन भी कहा जाता है।

डिस्टीमिया (डिस्टीमिया)

डिस्टीमिया, जिसे अब लगातार अवसादग्रस्तता विकार (पीडीडी) कहा जाता है, अवसाद का एक गंभीर रूप है।

पुरालिटी डिसऑर्डर: कुछ पर्सनालिटी डिसऑर्डर में, कम समय में तेजी से मूड स्विंग्स होते हैं।

विघटनकारी मनोदशा विकृति विकार (विघटनकारी मनोदशा विकृति विकार, DMDD)

DMDD का आमतौर पर केवल बच्चों में ही देखा जाता है। इससे पीड़ित बढ़ती उम्र के बच्चों में विकास काफी धीमे होता है।

हार्मोनल परिवर्तन:
हार्म भी मूड में बदलाव का कारण बन सकते हैं। किशोर और महिलाएं जो गर्भवती हैं या मीनोपॉज से गुजर रहे हैं, वे अपने शरीर के विकास के इस चरण से जुड़े हार्मोनल रोग के कारण मूड स्विंग्स का अनुभव करते हैं।

इसके अलावा तनाव, जीवन में कुछ अनचाहे बदलाव, आपकी डाइट, आपके सोने की आदत और दवाएं भी मूड स्विंग्स का कारण बन सकती हैं। ऐसे में बेहद जरूरी है कि आप शेड्यूल बनाएं और उसे फॉलो करें। एक्सरसाइज करें, एसए पानी पिएं और अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। (अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और सूचना सामान्य जानकारी पर आधारित हैं। हिंदी समाचार 18 इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)



LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read