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मीना कुमारी की शायरी: ‘चांद तन्हा है आसमां तन्हा’, पढ़ें मीना कुमारी के दर्द से लबरेज़ कलाम


मीना कुमारी की शायरी: हिंदी फ़िल्मों की ‘ट्रेजडी क्वीन’ कही जाने वाली मीना कुमारी (मीना कुमारी) ने जहां बैजू बावरा, साहिब बीवी और गुलाम और पाकीजा जैसी फिल्मों के ज़रिये अपनी अदाकारी की अलग छाप छौड़ी, वहीं उनकी पहचान एक शायरा के तौर पर भी है। उन्हें ग़ज़ल, नाज़ीम लिखीं और अपनी आवाज़ भी दी। मीना कुमारी का मूल नाम महजबीं बानो (महजबीन बानो) था, लेकिन शायरी में उन्होंने कहा कि उन्‍ नाज़ ’तख़्वाज़ रखा। उनकी ग़ज़लों का एक दीवान ‘चांद तन्हा’ (चांद तन्हा) नाम से प्रकाशित हो चुका है। मीना कुमारी की शायरी (मीना कुमारी की शायरी) में उनकी जिंदगी की मायूसी और अकेलेपन का दर्द छलकता नज़र आता है। आज हम आपके लिए मीना कुमारी ‘नाज़’ की शायरी से कुछ चुनिंदा कलाम के बारे में 20 आए हैं। आप भी इसका लुत्फ़ उठाइए-

भाग्य में नाम नहीं होता है
आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता गजब ज़ुल्फ़ की कालिख़ में घुल जाए कोई राही
बदनाम सही है, लेकिन ऐसा नहीं होता है

हंस- हंस के जवां दिल के हम क्यों न चुनेंगे
हर शख्स की किस्मत में नाम नहीं होता

बहते हुए आंसू ने आँखें से कहा थम कर
जो मय सेलटल हो वो जाम नहीं होता

दिन डूबे हैं या डूबे बारात के कश्ती
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता

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छोड़ देंगे ये जहाँ तन्हा
चांद तन्हा में आसमां तन्हा है
दिल मिला है जहाँ-जहाँ तन्हा

बुझ गया आस, छुप गया तारा
थरथराता रहा स्मं तन्हा

ज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं,
जिस्म तन्हा है और जां तन्हा

हमसफ़र कोई गर कभी मिले
दोनों ओर रहो तन्हा

जलती-बुझती-सी रोशनी के अलावा
सिमटा-सिमटा-सा एक मकन तन्हा

राह देखा सदियों तक रहेगा
छोड़ देंगे ये जहाँ तन्हा

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बेचैनी भी साथ मिली
टुकड़ों-टुकड़ों दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिला
जिसका जैसा आँचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूंदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आंखें हंस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली

जब चाहा दिल को समझें, हंसने की आवाज़ सुनी
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मिल गई

मातें कैसी व्यथाएँ, चलते रहें आठ पहर
दिल-सा साथी जब मिला, बेचैनी भी साथ मिली

होंठों को आना चाहिए, जाने कितने फार्म भरे
जलती-बुझती आँखें में, सादा-सी जो बात मिली (साभार / कविताकोश)



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