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मकर संक्रांति विशेष: दही-चूड़े का देसी ‘ब्रेकफास्ट’ स्वाद ही नहीं स्वास्थ्य में भी काम का है …


(विवेक कुमार पांडे)

मकर संक्रांति 2021: आज मकर संक्रांति (मकर संक्रांति) है और बिहार, यूपी, झारखंड के साथ ही नेपाल में दही-चूड़ा के लिए विशेष दिन है। पौराणिक कहानियों से लेकर पारंपरिक कर्मकांड में दही-चूड़ा का जिक्र होता है। पूरे भोजपूर में कोई शुभ कार्य विशेषकर दावत तबतक पूरी नहीं होती जबतक दही-चूड़ा न परोसा जाए। बिना आग यानी चूल्हे के ही यह खाना तैयार हो जाता है। मिठास के लिए पारंपरिक तरीके से इसमें देसी ग्राम का इस्तेमाल करते हैं। यह भोजन हाई-फाई और लो-कैल से भरा हुआ है। वैसे तो मकर संक्रांति पर इसका विशेष महत्व है लेकिन कई परिवार दैनिक तौर पर बतौर नाश्ता इसे लेते हैं।

चूहा का इतिहास
चूड़े की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी उत्पत्ति भारत में ही हुई है। यही कारण है कि पूरे देश में अलग-अलग तरह से इसे लागू किया जाता है। मराठी में पोहा, हिंदी में चिवड़ा, तेलगू में अतुकुलु, कन्नड में अवलकी, मलयालम में अवल, नेपाली में चिउरा, बिहारी (भोजपुरी, मैथली व मगही में चूड़ा, बंगाली में चीड़े और असमी में सेरा के नाम से यह जाना जाता है)। चूड़ा या चिवड़ा एक गुलेटिन-मुक्त खाद्य है। यह आयरन, फाइबर, मैग्नीशियम, विटामिन सी और ए से भरा हुआ है। लो-कैलोरी होने के कारण यह वजन कम करने का सबसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है। साथ ही स्थानीय उपलब्धता के अनुसार चूड़े की हमारे देश में लगभग 15 डिश हैं। इनमें दही-चूड़ा और पोहा सबसे प्रसिद्ध माने जाते हैं।यह भी पढ़ें: मकर संक्रांति 2021: मकर संक्रांति पर जरूर करें इन 3 चीजों का दान, पूरी तरह से मनोकामना होगी

दही का इतिहास

दही के गुणों के बारे में तो सभी को पता है। साथ ही शुभ कार्यों में इसकी भूमिका लगभग हर घर में होती है। पूरी दुनिया में दही का इस्तेमाल होता है। वैसे तो इसके उत्पत्ति के बारे में सटीक जानकारी नहीं है लेकिन माना जाता है कि पांच हजार साल पहले मेसोपोटामिया से इसकी उत्पत्ति हुई थी। भारत में दही-शहद तो ईश्वर का भोजन माना जाता है। दही के गुणों की सूचि बहुत ही लंबी है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम, विटामिन ए, सी, डी, ई, के, बी 6, बी 12 और कार्बोहाईड्रेट के साथ फैट व कई अन्य पॉस्क तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह एनर्जी फूड के तौर पर माना जाता है और पेट के लिए बेहतर विकल्पो में से एक है। भारत में कश्मीर से कन्याकुमारी तक लगभग हर घर में इसका उपयोग होता है।

देसी ग्राम
इसकी उत्पत्ति को लेकर थोड़ा सा विवाद है। भारत का दावा है कि 3 हजार साल से गन्ने से निकले गुड़ को हम खा रहे हैं। जबकि, कुछ इतिहासकारों का कहना है कि पुर्तगाल से यह भारत पहुंचा था। हालांकि, ग्राम का नाता हम भारतीयों का बहुत गहरा है और यही कारण है कि यह पारंपरिक भारतीय मिठास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन भरपूर मात्रा में होता है। प्रदूषण से लड़ने में भी ग्राम की भूमिका को वैज्ञानिक पुस्टी मिली हुई है। इसीलिए गुड़ को भी सुपरफूड के मार्गदर्शन में रखा जाता है। तमाम बीमारियों की अवस्था में इसका प्रयोग उम्दा माना गया है।

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खाने का तरीका
दही और चूड़े के गुणों से तो आप परिचित हो गए हैं। अब सोचिए कि ये तीनों को मिल गया तो जो नाश्ता तैयार होगा वह कितना बेहतरीन होगा। सबसे खास बात यह है कि यह मिनटों में तैयार हो जाता है और वह भी बिना किसी झंझट के। तो अगर आपके पास सुबह कम होती है तो इससे बेहतर नाश्ता कुछ नहीं हो सकता है। इसके लिए आप बाजार से चूड़ा ला सकते हैं। उसे दूध या पानी में भिगो के निकाल लें और उसके बाद दही के साथ एक कटोरे में रखें और गुड़ डाल कर अच्छे से मिला लें। तैयार हो जाओ। मकर संक्रांति के दिन यूपी-बिहार-झारखंड में इसे पारंपरिक आलू-गोभी की सब्जी का भी साथ मिल जाता है। (अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और सूचना सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। हिंदी समाचार 18 इनकी पुष्टि नहीं करता है। ये पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)



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