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भूल जाओ गुलाबी शहर जब देखो दुनिया की मशहूर ये 4 ‘ब्लू सिटीज- News18 हिंदी


वर्लड मैप्स (वर्ल्ड मैप) पर नजर डालें तो इतिहास के पन्नों में हर शहर की कोई ना कोई कहानी जरूर मिल जाएगी। कोई अपने खाने के लिए फेमस है तो कोई नाइट लाइफ के लिए। कहीं का ड्रेस फेमस है तो कोई खुद की खास बॉल शोट्रक्ट के कारण। ऐसे ही कुछ शहर ऐसे भी हैं जो अपने खास रंगों की कहानी के लिए दुनिया के पर्यटकों (पर्यटकों) को अपनी ओर से अट्रैक्ट करते आए हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं उन खास शहरों की जो अपने नीले रंग (ब्लू कलर) से सजे होने के कारण फेरिस्तों के बीच 0.9 मिलियन डॉलर हैं।

1. जोधपुर, भारत
राजस्थान का यह शहर जोधपुर विदेशी मजदूरों के बीच बहुत ही कूपुलर है। इसके रंग के पीछे की कहानी कही जाती है कि राजसथान के थार रेशीतन के इस शहर के कुछ भाग में बल्लू रंग का क्षेत्र था जहां भारतीय समाज के ब्राहमण रहते थे। उनकी पहचान दूर से ही हो इसलिए यह परंपरा आगे भी बढ़ी और आज यह सिटी बनलू रंग के कारण फेमस हो गई है। उन्नावत सामाजिक जाति का सिंबल रहा यह नगर आज अपने रंग की वजह से टूरिस्ट अट्रैक्शन का केंद्र बन गया है। कहा यह भी जाता है कि स्पंदन विमानों और कई बड़े क्षेत्रों का क्षेत्र होने के कारण इसे नीला रंग दिया गया था जिससे यहां शांति बनी रही।

2.सिटी बू सईद, ट्यूनीशिया
ट्यूनीशिया के करीब यह सिटी बू सईद नगर कहलाता है। कहा जाता है कि यह नगर को इस क्षेत्र के प्रसिद्ध निवासी, अबू मदन के एक श्टूडेंट ने खिलौने थे। जबकि यहाँ के एक निवासी बैरन रोडोलने डी एरलिंगर को इस शहर को बनलू रंग देने का क्रेडिट दिया जाता है। यह एक फ्रांसिसी कलाकार था, जिसका शहर का जूनून था, यह शहर नीला और सफेद रंग का है।

3. अनुजकर, स्पेन

स्पेन का एक छोटा सा गांव जुजकर। यहां के नील रंग के पीछे भी कहानी है। इस खलर कल्चर के गांव के बारे में कहा जाता है कि यहां ” द स्मर्फ 3 डी ” नाम के मूवी की शूटिंग के दौरान इस रंग से रंगा गया था। लेकिन बाद में जब खादी टीम ने गांव वालों को अपने मर्जी का रंग लगाने के लिए कहा गया तो गांव वालों ने इसी रंग को अपना लिया। तब से यह शहर इसी रंग में सजा है।

4. शेफचैन, मोरक्को
मोरक्टको का यह शहर वास्तव में बहुत खूबसूरत है। यह 1471 में यह रंग मिला। इस नगर की दीवारें नीली और उसवा बिंदीदार है। रंगों के इस कॉम्बीनेशन की वजह से यहां माउंटेन साइट बहुत ही खूबसूरत नजर आती है। कहा जाता है कि शेंगेन से फरार यहूदी शरणाथियों ने यहां शरण ली थी और तभी से यहां की दीवारों पर नीले रंग की है ।बताते हैं कि 1471 में यह पूरी तरह से नीले रंग में रंग दिया गया था। (अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और सूचना सामान्य जानकारियों के आधार पर हैं। हिंदी समाचार 18 इनकी पुष्टि नहीं करता है। ये पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)



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