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भारत की नहीं है ‘अपनी’ इडली, अब तो सब भारतीय है! – News18 हिंदी


(विवेक कुमार पांडेय)

इडली (इडली) तो हम में से बहुत सारे लोगों को पसंद है। आम तौर पर वर्तमान में जिस इडली को हम खाते हैं उसे दक्षिण भारतीय खाद्य (दक्षिण भारतीय खाद्य) के नाम से ही जानते हैं, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इडली तो भारतीय भोजन ही नहीं है। जी हां! चौंकिए मत यह सच है। इतिहासकारों की मानें तो इडली का ओरिजिन इंडोनेशिया (इंडोनेशिया) में हुआ था। वहां फरामिंटेड खाना ज्यादा उत्सर्जित होता है और इडली भी उन्हीं की ईजाद है।

इस तथ्य के साथ कहा जाता है कि इंडोनेशिया से काफी खानसामें (कुक) भारत में राजघरानों के किचन में आए थे। इसी दौरान इडली की रेसिपी भी वे लेकर आए थे। हालांकि कुछ इतिहासकार इस तथ्य से सहमत नहीं हैं। फिर भी इसके पक्ष में कहा जाता है कि इंडोनेशिया की ‘केडली’ हमारी इडली से बिल्कुल मेल खाती है। हालांकि इडली नाम भारत में काफी समय से है, लेकिन इस इडली को बनाने में बेसन का इस्तेमाल किया जाता था।

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कुछ लोग यह भी दावा करते हैं कि गुजरात में इडली (इडली) का विकास हुआ था, क्योंकि यहां बनने वाला ढोकला आदि भी इसी तर्ज पर बनाया जाता है। बताया जाता है कि मार्डन इडली जिस रेसिपी से बनाई गई है उसका जिक्र 1250 ई है। । ही मिलता है। जिसमें चावल का घोल, उसे फरमेंट करने का तरीका और स्टीम करने का तरीका बताया गया है। हालांकि इडली कहीं से आई हो आज देश के सभी किचन का हिस्सा है।

इस बीच कई खानों को लेकर विवाद होता रहता है, लेकिन एक बात और आपको बता दूं कि इडली के लिए हर साल 30 मार्च का दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दिन को ‘विश्व इडली दिवस’ (विश्व इडली दिवस) के रूप में । मनाया जाता है। इडली की दीवानगी इसी से समझी जा सकती है कि नार्थ इंडिया में भी इडली का बैटर बाजार में खूब बिकता है और स्न के तौर पर इसे खूब पसंद किया जाता है।

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साथ ही दक्षिण भारतीय असर होने के कारण इसे नारियल की चटनी और सांभर के साथ परोसा जाता है। कुछ स्थानों पर इडली सांभर और चटनी में डूबो कर देते हैं और कहीं यह सब अलग-अलग दिया जाता है। आजकल तो इडली को लेकर बहुत से प्रयोग होते हैं। चावल के साथ चुकंदर, पलक, मटर आदि मिला कर अलग-अलग रंग की इडलियां बनती हैं। साथ ही रेस्टोरेंट्स में ‘बेबी इडली’ भी खूब पसंद की जा रही है।



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