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बटरफ्लाई और ये योगासन हैं सबके लिए लाभकारी, सीखें योग एक्सपर्ट सविता यादव से- न्यूज़ 18 हिंदी


(सविता यादव)

आज के योग सेशन (लाइव योग सत्र) में हाफ बटरफ्लाई, बटरफ्लाई आसान, कपालभारती (कपालभाती) से लेकर छोटे-छोटे कई अभ्यासों को करने के बारे में बताया और दिखाया गया है। ये अभ्यासों को करने से न केवल मनुष्य स्वस्थ (स्वस्थ) रह सकते हैं बल्कि उसे हर प्रकार के तनाव (तनाव) से भी मुक्ति मिलती है। योग एक कला है और इसका अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए। आप एक दिन में निपुण नहीं बन सकते। अभ्यास करते हुए ही यह एक प्रयुक्त के रूप में उभर कर कर देगा। इस लाइव योग सेशन में कपालभारती, पैर, पंजो, गानेंद, कमर, कुल्हे, गर्दन, कंधे, पीठ और हाथों के लिए छोटे और आसान अभ्यास सिखाए गए।

बटरफ्लाई आसन:
बटरफ्लाई आसन को ड्रैगन आसन भी कहते हैं। महिलाओं के लिए ये आसन विशेष रूप से लाभकारी है। बटरफ्लाई आसन करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं ,ाइन की हड्डी सीधी रखें। घुटनो को मोड़ना और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं। दोनों हाथों से अपने अपने पांव को कस कर पकड़ लें। सहारे के लिए अपने हाथों को पांव के नीचे रख सकते हैं। एड़ी को जननांगों के रूप में लगभग हो सके लाने का प्रयास करें। लंबी, गहरी सांस लें, सांस छोड़ते हुए घटनों और जांघो को जमीन की तरफ झुकाना डालें। क्रिस्टल के पंखों की तरह दोनों पैरों से ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें। धीरे धीरे तेज करें। सांसें लेटें और सीसे छोड़ें। शुरुआत में इसे जितना संभव हो सके उतना ही करें। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाते हैं।

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कपालभारती:
कपालभारती बहुत ऊर्जावान उच्च उदर श्वास व्यायाम है। कपाल अर्थात मस्तिष्क और भाति अर्थात स्वच्छता अर्थात अर्थात कपालभारती ’वह प्राणायाम है जिससे मस्तिष्क स्वच्छ होता है और इस स्थिति में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से संचालित होती है। इसी तरह इस प्राणायाम के अन्य लाभ भी हैं। लीवर किडनी और गैस की समस्या के लिए बहुत लाभ कारी है। कपालभाती प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें। इसके बाद से तेजी से नाक के दोनों छेदों से सांस बाहर निकल जाती है। साथ ही पेट को भी अंदर और बाहर की ओर संकुचित करें। इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को कैंसर के संभावित रूप से बाहर आने देते हैं। इस क्रिया को शक्ति व 50 बार से धीरे-धीरे उठते हुए 500 बार तक कर सकते हैं लेकिन एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें। क्रम धीरे-धीरे बढ़ा। यह कम से कम 5 मिनट और अधिकतम 30 मिनट तक कर सकता है।

कपालभारती के फायदे
ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है
सांस संबंधी बीमारियों को दूर करमे में मदद मिलती है। विशेष रूप से अस्थमा के पेशेंट्स को विशेष लाभ होता है।
महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है
पेट की चर्बी को कम करता है
पेट संबंधी रोग और कब्ज की परेशानी दूर होती है
रात को नींद अच्छी आती है
ये लोग कपालभारती न करें
प्रेग्नेंट महिलाओं को इसे करने से बचना चाहिए
जिसकी कोई सर्जरी नहीं हुई हो, वह इसे न
गैस्ट्रिक और एसिटीडे ने इसे धीरे-धीरे करने की कोशिश की।
पीरियड्स में बिल्कुल न करें।
हाई बीपी और हार्ट संबंधी रोगों के पैशेंट्स इसे करने से।

भ्रामरी प्राणायाम
यह प्राणायाम सुबह और शाम दोनों साथ ही कर सकता है। प्राणायाम को करें ध्यान रहे कि आसपास का वातावरण शांत हो।

भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका
– भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए जमीन पर बैठ जाओ। इसके बाद दोनों हाथों की कोहनियों को मोड़कर कानों तक ले जाएं और शिशु के मोटे से कानों को बंद कर लें।
– कानों को बंद करने के बाद हाथों की तर्जनी उंगली और मध्यमा, कनिष्का उंगली को आँखों के ऊपर ऐसे रखें जिससे पूरा चेहरा ढका हो। इसके बाद मुंह को बंद करके नाक से हल्की-हल्की सांस को अंदर और बाहर छहोड़े।
– 15 सेकेंड तक ये आसान करने के बाद वापस से नॉर्मल स्थिति में आ जाएं। इस प्राणायाम को 10 से 20 बार रिपीट किया जाता है। आप चाहे तो शुरुआत में इसे 5 से 10 भी कर सकते हैं।



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