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“… तो आज क्या खिचड़ी पक रही है?” यह शुद्ध भारतीय हथियारों का किस्सा भी खास है


खिचड़ी की दिलचस्प कहानी जानें (फोटो क्रेडिट: इंस्टाग्राम / फूड_इस_ब्लूब 2224)

मुगल शासकों के खानसामे भी खिचड़ी बनाते थे। कहा जाता है कि जहांगीर तो प्रतिदिन खिचड़ी का स्वाद लेते थे। खिचड़ी से प्रेरित होकर कई नए भोजन भी बनाए गए थे।

  • News18Hindi
  • आखरी अपडेट:15 जनवरी, 2021, 10:47 AM IST

(विवेक कुमार पांडेय)

देश के कई हिस्सों में आज भी मकर संक्रांति मनाई जा रही है। बिहार और यूपी के कुछ हिस्सों में इसे खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। दही-चूड़े के साथ खिलचड़ी भी मकर संक्रांति के अवसर पर खाई जाती है। खिचड़ी का ओरिजिन भारत में ही माना जाता है और देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके से इसे बनाया और परोसा जाता है। आम तौर पर ‘बिरबल की खिचड़ी’ और ‘क्या खिचड़ी पका रही हो’ जैसी कहावतों का जिक्र हम सुनते ही रहते हैं लेकिन इसका इतिहास हमारे देश में बहुत पुराना है।

नाम में ही सब रखा है!चूंकि खिचड़ी (खिचड़ी) का ओरिजिन भारत में ही है, इसलिए इसका नाम की प्रेरणा भी संस्कृत से ली गई है। संस्कृत के ‘खिच्चा’ शब्द से यह नाम निकला है। भारत के हर राज्य में खिचड़ी के अलग-अलग प्रकार उपलब्ध हैं। कई अच्छे कार्यों में खिचड़ी बनाई जाती है। विशेष अवसरों पर खिचड़ी का नाम भी बदल जाता है जैसे बंगाल में पूजा के समय इसे ‘भोग’ कहा जाता है।

पुराने से नए इतिहास में भी खास है!

महाभारत में खिचड़ी का जिक्र कई बार आता है। कृष्ण सुदामा की कहानियों के साथ ही पांडवों के वनवास के दौरान खिचड़ी बनने का जिक्र है। इसके अलावा ग्रीक राजा सैल्यूकस ने 305-303 (ईसा पूर्व) ईसापूर्वक में भारत की खिचड़ी का नाम लिया है। महान लेखक इब्न बबूता ने भी अपनी किताब में खिचड़ी का जिक्र किया है।

राजाओं का खाना!

वैसे तो खिचड़ी को साधारण भोजन माना जाता है लेकिन राजाओं की रसोई में भी यह काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसी से प्रेरणा के बारे में मुगल शासकों के खानसामे भी खिचड़ी बनाते थे। कहा जाता है कि जहांगीर तो प्रतिदिन खिचड़ी का स्वाद लेते थे। खिचड़ी से प्रेरित होकर कई नए भोजन भी बनाए गए थे।

खिचड़ी के पाँच यार!

हर हिस्से में खिचड़ी बहुत चाव से खाई जाती है लेकिन बिहार और यूपी के कुछ इलाकों में इसका एक विशेष “प्रोटोकॉल” भी है। परंपरा के अनुसार खिचड़ी के यहां पांच यार यानि मित्र बताए गए हैं। इनमें चोखा, चटनी, पापड़, दही और आचार शामिल है। इसका मतलब है कि जब भी खिचड़ी बनेगी, साथ में यह सब होगा। इस क्षेत्र में शनिवार को खासतौर से खिचड़ी बनाने का प्रचलन है।

खिचड़ी के फायदे!

खिचड़ी तो वैसे कई तरीकों से बनाई जाती है लेकिन दालों और चावल के साथ सब्जियों को मिलाकर बनाई गई खिचड़ी ज्यादा इस्तेमाल होती है। इसके अलावा साबूदाने, दलिया या अन्य अनाजों की खिचड़ी भी बनाई जाती है। खिचड़ी में कार्बोहाईड्रेट, कैल्शियम, विटामिन और कई अन्य एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं।





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