HomeHealthजानिए करता है मैंसप्लेनिंग, कहीं आप भी तो नहीं बने?

जानिए करता है मैंसप्लेनिंग, कहीं आप भी तो नहीं बने?


आप जूलरी की टीचर है और बहुत बेहतर तरीके से अपने स्टूडेंट्स को रिप्रोडेक्टिव सिस्टम के बारे में बता रहे हैं, अचानक आपके हिंदी पढ़ाने वाले एक कलीग आते हैं और आप कहते हैं कि मैडम इसे इस तरह से बच्चों को बता दें तो ठीक रहेगा। तब कैसा महसूस किया है आपने, खीज होता है न? मन करता है कह दें कि हमें इस बारे में ज्यादा पता होना चाहिए। आप अपने कलीग के इस तरह के व्यवहार को कोई नाम नहीं दे पा रहे हैं तो हम आपको बताते हैं कि यह क्या नाम है। इसे आईसप्लेनिंग (मैंसप्लेनिंग) कहते हैं। जी हां इसकी जड़ें पितृसत्तामक माइंड सेट से इस कदर जुड़ी हैं कि लोग यह स्वीकार कर ही नहीं पाते कि एक महिला भी अपने विंग में पटेल हो सकती है, पर असर हो सकता है। तो फिर इस तरह के व्यवहार से निपटने के लिए तैयार हो जाओ, न इससे खुद को कमतर आंकें और न ही अपने सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी लाएं।

कहां से आया ये शब्द:

अंग्रेजी के शब्द एक्सप्लैसन (व्याख्या करें) के बोलचाल का शब्द स्प्लैन (रोंसादे) दो सौ से अधिक वर्ष से उपयोग में है। लेकिन यह प्रसिद्ध हुआ वर्ष 2008 से जब अमेरिकी राइटर रेबेका सोलिनेट का एक एसे (एस्से) ‘मेन एक्सप्लोजन थिंग्स टू मी’ (पुरुष मुझे चीजें समझाएं) टोमिकस्पेश डॉटकॉम हुआ पब्लिश हुआ। यह उन्होंने अपनी पार्टी के एक अनुभव से प्रेरित होकर लिखा था। हालांकि अपने इस एसे में रबेका ने आईसप्लेनिंग शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन उन्होंने इस बिहेवियर को “कुछ जो हर औरत जानती है” के रूप में बताया है। रेबेका का यह शब्द यहीं नहीं रूका उनके एसे के एक महीने बाद यह शब्द सोशल नेटवर्क लाइव जर्नल पर एक कमेंट में दिखाई दिया और जल्द ही मेनस्ट्रीम समीक्षा में आने से पहले ये शब्द फेमनिस्ट ब्लॉगर्स के बीच प्रसिद्ध हो गए हैं। इस शब्द को 2010 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने वर्ड ऑप दि ईयर के खिताब से नवाजा तो साल 2012 में अमेरिकन डायलेक्ट सोसाइटी ने इसे साल के सबसे रचनात्मक शब्द “सम्मान के लिए नामांकित किया और ये यहीं नहीं रूका साल 2014 में 1 वार्षिक ऑर्डर्ड डिक्शनरी में इसे जोड़ा गया। लिया गया।

ये भी पढ़ें: मेनोपॉज में महिलाएं न लें टेंशन, इन खास शिशुओं को खाने से रहेंगी हेल्दी

रेबेका अनुभव क्या था:

अपनी किताब ‘मेन एक्सप्लैंस थिंग्स टू मी’ एसे में रेबेका ने पार्टी के एक किस्से को आधार बनाया हैइस पार्टी में एक आदमी को पता चला कि रेबेका की लेटेस्ट बुक ब्रिटिश फोटोग्राफर एडवर्ड मायब्रिज (ईडरविद म्यूब्रिज) पर आई हैं। उस आदमी से बातचीत के दौरान जब वह उसे अपनी किताब के बारे में बताने लगी तो उसने बीच में ही उनकी बात बुरी तरह से काटकर उन्हें किसी धर्म गुरु की तरह उसी फोटोग्राफर पर लिखी एक महत्वपूर्ण पुस्तक पढ़ने की सलाह दे डाली जो किताब खुद रेबेका ने की थी। लिखी थी। एक तरह से वह आदमी उनकी योग्यता पर सवाल खड़े कर रहा था। वह सदियों से चली आ रही एकता की वजह से यह मानने को तैयार नहीं था कि वह उस तरह की किताब लिखने की काबिलियत रखता है। रेबेका ने इस पुस्तक में हर महिला के कभी न कभी इस तरह के बिहेवियर के सामना करने की बात कही है।

मैंसप्लेनिंग का मतलब:

मैंसप्लेनिंग एक ऐसा शब्द हैं, जिसका मतलब है बहुत ही साधारण तरीके से और जबरन अनुग्रह कर, अति आत्मविश्वास के साथ विशेषली किसी महिला को गलत या नीचा दिखाते हुए उस पर कमेंट करना या उसे समझाना। फिर चाहे आपको यह पता हो या न हो कि जिस सब्रे या विषय विशेष पर आप उस महिला को सलाह दे रहे हैं, उसे कमतर साबित कर रहे हैं वह उस सब पॉइंट की एक्सपर्ट है। इस तरह का बिहेवियर सदियों से चली आ रही पुरुष की उस काल्पनिक सोच का नतीजा है जहां वह सोचती है कि महिलाएं कम जानकारी रखती हैं। हम इसमें पुरुषों को भी दोष नहीं दे सकते क्योंकि समाज में यह सोच गहरी बैठा दी गई है, न चाहते हुए भी किसी भी काम को बेहतर करने में पुरुषों को ही तरजीह दी जाती है। अगर कोई महिला किसी काम में बेहतर कर भी ले तो उसे अजूबे की तरह लिया जाता है।

ये भी पढ़ें: विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस 2021: जानें क्यों मनाया जाता है ये खास दिन, कैसे हुई शुरुआत

अस्तिव में है:

कोई ये कह दे कि मैंसप्लेनिंग शोशेबाजी से अधिक कुछ नहीं तो ऐसा नहीं है। 17 वीं सदी से ही इस पर बातें होने लगी थी हो सकता है कि अभी इस तरह के बिहेवियर के लिए कोई सटीक शब्द न मिल पाया जाए। यहाँ यह बात भी गौर करने लायक है कि जब से समाज बना है तभी से ये आस्तिव में हैं। आए दिन होने वाली घटनाएं यह बताने के लिए काफी है कि मैंसप्लेनिंग अस्तिव में है। अब इस घटना को ही लें जिसमें फोमर्स नासा साइंटिस्ट अनिता सेनगुप्ता सोनी पर भारतीय पुरुषों की आईसप्लेनिंग की शिकार हुईं। उन्होंने चंद्रयान दो मिशन पर पृथ्वी के अलावा अन्य स्थानों में रोबोटों के ओवरऑल साइंस के बारे में जानकारी दी थी। इसके तुरंत बाद ही 20 साल की इस अनुभवी साइंटिस्ट की बात को काटते हुए भारतीय पुरुष सोनी पर अपना ज्ञान बघारने लगें। इसके तुंरत के बाद इस साइंटिस्ट ने ट्विटर पर इन पुरुषों को आड़े हाथों लेते हुए आईसप्लेनिंग का फ्लो चार्ट शेयर किया था। आपने अगर एमटीवी का कैटरीना कैफ और रणवीर कपूर का इंटरव्यू देखा होगा तो आपको समझ आ गया होगा कि किस तरह से रणवीर कैटरीना के क्वेशचन्स को मैंसप्लेन कर रहे थे। वर्ष 2009 का वीडियो म्यूजिक अवार्ड (वीएमएज़) आपको याद होगा जब टेलर स्विफ्ट को कान्ये वेस्ट से मंच पर चलते लगभग उनके हाथ से माइक छीनते हुए उन्हें बीच में ही बोलने से रोक दिया गया था। इस पर बहुत कंट्रोवर्सी भी हुई थी और यह वीडियो क्लिप 23 मिलियन बार देखी गई थी।

नेगेटिव इफेक्ट्स:

जब कोई व्यक्ति मैन्सप्लेन करना शुरू करता है तो यह आपको फांसा हुआ महसूस करवा सकता है। इससे बचने के दो विकल्प हैं: या तो आप उसे डपट पाएं या फिर बुरी बुरी भावना के लिए तैयार रहें। मैंसप्लेनिंग झुंझलाहट और निराशा की भावनाओं को ट्रिगर कर सकता है। यह आपकी हार्ट रेट बढ़ा सकता है। इस कारण से आपकी बॉडी के हार्मोनल रिस्पांस के तरीके में भी बदलाव आ सकते हैं। अडनल ग्लैंड किडनी के ठीक ऊपर होते हैं, तनाव होने पर यह अद्र्रेनलिन, टेस्टोस्टेरोन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन हटाती हैं। मंससप्लेनिंग फेसियल एक्सप्रेशन में चेंज की वजह भी है। यह आपके करियर को खराब कर सकता है। मेंटल और साइकोलॉजिकल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

ये भी पढ़ें: जानें कैसे रखें वजाइना को साफ, नहीं होगा ये गंभीर बीमारियां

स्टडीज बताती हैं होती हैं आईसप्लेनिंग

लैंग्वेज और सोशल साइकोलरी जर्नल में प्रकाशित एक पेपर के बारे में, बातचीत या मिलना के दौरान महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक बार इंटरेप्ट किया जाता है।

व्यावसायिक बैठक के दौरान पुरुष बातचीत पर हावी होते हैं। 2012 में ब्रिघम यंग विश्वविद्यालय और प्रिंसटन के शोधकर्ता के एक अध्ययन से पता चला है कि महिलाओं को प्रोफेशनल मीटिंग्स में केवल 25 प्रति बोलीं जबकि पुरुषों ने मुलाकात के औसतन 75 प्रतिशत हिस्से पर बातचीत की।



LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read