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चाणक्य निति गीता उपदेश ने गलत संघों और आलस्य को जीवन में सफलता की ओर अग्रसर नहीं होने दिया


सफ़लता की कुनजी: चाणक्य की चाणक्य नीति कहती है कि व्यक्ति अपने गुणों से महान बनता है। गीता के उपदेश में भी भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से गुणों की चर्चा करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि गुणों से युक्त मनुष्य अपनीं इंदियों पर विजय प्राप्त करता है।

जीवन में सफलता सभी को चाहिए लेकिन सफलता इतनी आसानी से प्राप्त नहीं होती है। स्वामी विवेकानंद के अनुसार जीवन में सफल होने के लिए निरंतर प्रयत्न करते रहना चाहिए, जो व्यक्ति असफल होने पर रूक जाता है। और अपने लक्ष्य का त्याग कर देता है उसे सफलता कभी नहीं मिलती है। स्वामी विवेकानंद के अनुसार मनुष्य को अपने लक्ष्य की प्राप्ति से पहले कहीं नहीं रूकना चाहिए।

परिश्रम से प्राप्त सफलता स्थाई होती है। इसकी चमक दूर तक दिखाई देती है। परिश्रम से प्राप्त की गई सफलता आत्मविश्वास में वृद्धि करती है। सफलता प्राप्त करना आत्मविश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जीवन में सफल होना चाहते हैं तो ये आदतों से दूर कर रहे हैं।

गलत संगत से दूर रहें
चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को गलत संगत से बचना चाहिए। गलत संगत में रहने से अपयश प्राप्त होता है। प्रतिभा नष्ट होती है। व्यक्ति के जीवन में संगत का विशेष महत्व बताया गया है। अच्छी संगत में बैठने से प्रतिभा में निखार आता है। ज्ञान में वृद्धि होती है।

आलस से दूर रहो
आलस से दूर रहना चाहिए। आलस व्यक्ति की प्रतिभा का नाश करता है। आलसी व्यक्ति अपने सभी कार्यों को समय पर पूर्ण नहीं कर पाता है जिसके कारण उसे हानि उठानी पड़ती है। आलस एक रोग की तरह से इससे बहुत जल्दी हो सके, दूरी बनावे चाहिए। आलसी व्यक्ति के पास अवसरों की कमी रहती है।

झूठ नहीं बोलना चाहिए
सफल होने के लिए झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। झूठ बोलने की आदत से दूर रहना चाहिए। झूठ बोलने वाले व्यक्ति को कहीं भी सम्मान प्राप्त नहीं होता है। समय आने पर झूठ बोलने वाले व्यक्ति सभी लोग दूरी बना लेते हैं। समाज में ऐसे लोगों को संदेह की दृष्टि से भी देखा जाता है। इसलिए इस प्रयोग से दूर रहें।

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