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कोलकाता का कटलेट दिल्ली में, खाकर आप भी पहुंच जाएंगे बंगाल की गलियों में- News18 हिंदी


(विवेक कुमार पांडेय)

बात कर अगर ‘कटलेट’ की चले तो कलकत्ता (कोलकाता) का जिक्र आ जी जाता है। बंगाल में कटलेट का काफी चलन है साथ ही ‘चॉप’ तो लगभग एक स्टेपल फूड ही है। कोलकाता की गलियों में घूमते हुए आप कई ट्राली और स्टॉल मिल जाएंगे जहां अलग-अलग चॉप तले जा रहे होंगे। लेकिन, अगर आप दिल्ली में तो भी आपको निराश होने की जरूरत नहीं है।

जी हां! दिल्ली में सीआरएम पार्क (सीआर पार्क), कोलकाता से बाहर बिल्कुल ‘दूसरा कोलकाता’ है। यहाँ कुछ देर ही समय रुकने के बाद आप वास्तव में कोलकाता की यादों में घुल मिल जाएंगे। यहां की दुकानें, यहां का खाना और बातचीत … ये सबकुछ कल की शब्दावली नवीनतम कर देता है। मैं बात कर रहा था चोप की, तो अगर ‘कोलकाता खुद दिल्ली में मौजूद है तो मैं आपको बताने जा रहा हूं एक राज हूँ …

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सीआर पार्क में मुख्य रूप से दो पुराने बाजार हैं। और, जिस दुकान की मैं बात करने जा रहा हूं वह मार्केट नंबर दो है। दद्दू कटलेट / चॉप (डैडकुटलेट) शाप। बाजार में घुसते ही कोने में एक छोटी सी दुकान है। यहाँ आपको अलग-अलग तरह के कई कटलेट / चॉप मिल जाएंगे। इसमें फिश, चिकन, मटन और एग शामिल है। आप कच्चे भी ले जा घर पर तल सकते हैं और यहाँ भी तलवाकर खा सकते हैं।

वैसे तो सभी के स्वाद एक से बढ़कर एक होते हैं लेकिन दद्दू के मटन चॉप की बात ही अलग है। शाम को ही यहां लंबी कतारें लग जाती हैं। शाम शाम तक अगर आप पहुंचेंगे तो शायद आप खाली हाथ ही लौट आएंगे। हाइजीन यहां का मुख्य आकर्षण मुझे लगा। कटलेट / चॉप (कटलेट / चॉप) के अलावा भी कई आइटम ये देने लगे हैं लेकिन लोग मुख्य रूप से यहां कटलेट / चॉप के लिए ही आते हैं।

मधुपर्णा दास कोलकाता से अपने पीसी यानि बुआ के यहाँ आई हैं। उनकी कंपनी उन्हें दिल्ली ट्रांसफर दे रही है लेकिन वह कोलकाता छोड़ना नहीं चाहती थी। लेकिन, जैसे ही उन्होंने सीआर पार्क में कुछ दिन बिताएं उन्हें लग गई कि कोलकाता की शब्दों में ताजा होता है स्टेगी और बंगाली गोका का बना रहेगा।

वो बताती हैं कि दद्दू के कटलेट इतने ऑथेंटिक हैं कि कोलकाता में भी हर जगह पर ऐसे खाने नहीं मिलते। उनके साथ आई उनकी चचेरी बहन मधुरिमा का कहना था कि वे बचपन से यहां आ रही हैं। उन्हें यहाँ के मटन और फिश दोनों चॉप बहुत पसंद हैं।



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