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कैफ़ी आज़मी जन्म वर्षगांठ: दबाए गए सा सही दिल में प्यार है कि नहीं, पढ़ें कैफ़ी आज़मी की शायरी | kaifi azmi की जयंती kaifi azmi प्यार शायरी ग़ज़ल bgys– News18 हिंदी


कैफ़ी आज़मी जन्मदिन (कैफ़ी आज़मी जन्म वर्षगांठ): कैफ़ी आज़मी (कैफ़ी आज़मी) का नाम हिन्दुस्तान के प्रसिद्ध शायरों में शुमार किया जाता है। आज उनका जन्मदिन है कैफ़ी आज़मी का 14 जनवरी 1919 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के एक छोटे से गाँव मिजवां में हुआ था। कैफ़ी साहब का मूल नाम अख्तर हुसैन रेवी था। कैफी आजमी के पिता उन्हें एक मौलाना के रूप में देखने चाहते थे, लेकिन कैफी आजमी को उससे कोई सरोकार नहीं था और वह मजदूर वर्ग के लिए कुछ करना चाहते थे। कैफ़ी आजमी सिर्फ अपनी नज़्मों तक ही प्रगतिशील नहीं बल्कि अपनी ज़िंदगी में भी उसी तरह प्रोग्रेसिव रहे। नजमों के लिखने वाले शायर ने अमीरी-गरीबी के अंतर को मिटाने की बात की, पुरुषों और महिलाओं को सामान देने की बात की। आज कैफ़ी आज़मी के जन्मदिन पर हम आपके लिए रेख्ता के साभार से लेकर आए हैं कैफ़ी आज़मी की कुछ ग़ज़लों, नज़्म और शायरी …

1 है। तुम बहुत जो मुस्कुरा रहे हो

क्या ग़म है जो को छिपकर हो

आँखों में नमी हँसी लबों पर

हाल ही में क्या दिखा रहा है

बन गया घूमे ज़हर पीते पीते

ये अकई जो पीते जा रहे हैं

जिन ज़ख़्मों को वक़्त भर गया है

तुम क्यूँ उन्हें छेड़े जा रहे हो

रेखाओं का खेल मुक़द्दर है

लाइनियन से माँ खा रही हो।

२। झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं

दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं

आप अपने दिल की जवाँ धड़कनों को गिन के बताएं

मिरी तरह तिरा दिल बे-क़रार है कि नहीं

वो पल जो कि मोहब्बत में होता है

उस एक पल का तुझे इंतिज़ार है कि नहीं

तिरी उमी पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया को

तुझे भी अपने पे ये ए’तिबार है कि नहीं।



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