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कहीं आपका स्वास्थ्यचाचा मोबाइल एडिक्टेड तो नहीं, इग्नोर न करें, तुरंत अपनाएं ये 7 तरीके- News18 हिंदी


अगर आपका स्वास्थ्यचाचा भी मोबाइल (मोबाइल), लैपटॉप (लैपटॉप), टैब (टैब) के बिना कुछ देर भी नहीं रहता है, तो सतर्क हो जाइए। यह छोटी सी लापरवाही आपकी और आपकी पीड़ा के लिए बड़ी मुसीबत ला सकती है। वास्तव में अधिक अंकक सूरत देखने के आदी हो चुके बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से अधिक एग्रेसिव और चिड़चिड़ेपन के शिकार हो रहे हैं। यह नहीं है, उनमें डिप्रेशन (अवसाद), अनिद्रा जैसी मानसिक समासयाएं भी देखने को मिल रही है।

अधिक मोबाइल देखने की वजह से शिशुसन की आँखें, गर्दन, सिर आदि में दर्द भी आम है। विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि अगर न्यूजनिक की इस आदत में तुरंत सुधार नहीं किया गया तो आगे चल कर वह एंटीसोशल (अनसोशल) और एंटी सोशल (एंटी सोशल) भी हो सकते हैं। ऐसे में यहां आपको कुछ ऐसे उपाय बताए जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने कैंसरनिक की इस आदत से बाहर आने में मदद कर सकते हैं।

1 है। बचे अपने माता पिता के परछाईं होते हैं। उन्हें अपने पेरेंट्स की नकल करना बहुत ही लगता है। ऐसा कहा जा सकता है कि नेशे पहली बार मोबाइल या लैपटॉप को अपने पेरेंट्स की नकल करते ही उठाते हैं। ऐसे में काम के अलावा भी अगर आप मोबाइल में लगे रहते हैं तो सबसे पहले अपना इस्तेमाल किया जाता है। न्यूज़ीलैंड के लिए वफ़्त और मोबाइल पर बिना मतलब समय बिताने की जगह जॉन्सन के साथ खेलें।

२। तीन-चार साल के बच्चों के साथ बचपन से ही अपने साथ छोटे मोटे काम में इंगेज करें। गमले में पानी डालना, डस्टिंग, कपड़े तह करना, उनमें सही जगह पर रखना जैसे काम उन पर बहुत ही पसंद आते हैं। उनकी जटिलताओं को एन्जॉय करें और उन्हें भी यह एहसास दिलाता है कि वह कितनी मददगार हैं। इससे उनका आद्यमविवि भी बढ़ेगा और वे आदममहार्श्व भी बनेंगे।

३। अपने बच्चों के लिए हर कला में एएक्सपोजर चलो। पेंटिंग, डांस, म्यूजिक घर में ही सिखाए जाते हैं। जबरदस्ती ना करें। उन्हें खुद से करने दें। कम उम्र में एएक्सपर्ट बनाने की ना सोचें। उनहें लाइफ इंज्वावॉय करने दें। उन लोगों को सिखाता है कि मोबाइल से कहीं बेहतर उनका कलाकार है। धीरे धीरे वे मोबाइल पर कम कर देखेंगे।

४। Am upend और Canillon को वॉक पर जाने की आदत डालें। पार्क में उनके साथ खेलते औैर मौज मस्ती करें। उनहें नेचर का संदेशव समझा। इससे उनमें सोचने-समझने की क्षमता बढ़ जाती है। वे अकेले में भी इन विषयों पर सोचेंगे और मोबाइल नहीं मांगेगे।

५। मार पीट कर ना सिखाएं नहीं तो शिक्षाचे जिद्दी हो जाएंगे। ऐसा नहीं है, वे छिप कर काम करना सीखेंगे।

६। कभी भी मोबाइल देखने का लालच देकर कोई काम नहीं करते। कई बार माता-पिता लालच दे देते हैं और मोबाइल नहीं देते, ऐसे में इसका निगेटिव असर पड़ता है और बच्चों में अविश्वास की भावना आ जाती है।

।। हमेशा याद रखें, अगर न्यूज़िनो की कोई आदत बदलनी है तो सबसे पहले उस इस्तेमाल को खुद छोडें। ऐस्किषशेचे अपने माता पिता की ही परछाईं होते हैं। (अस्वीकरण: इस लेख में दी गई परिवर्तन और अधिसूचना सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। हिंदी समाचार 18 इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)



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